Sunday, March 2, 2014

शून्य की परछाईं

English: Red sunrise over Oostende, Belgium
 (Photo credit: Wikipedia)
सितारों में लीन हो चुके हैं स्याह सन्नाटे
ख़लाओं को हाथों में थामें
दिन फूट पड़ा है लम्हा - लम्हा
      रोशनी को अपनी
      ढलती चाँदनी की चादर पर बिखराता

अंधेरों की गहरी मौत
शून्य की परछाईं में धड़कती है अब तक
जिंदा है
न जाने कब से —
न जाने कब तक |   


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